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कमलगट्टा: फायदे और खाने के तरीके

कमलगट्टे का नाम तो आपने सुना ही होगा। कमलगट्टा, कमल का ही फल है, जिसका निर्माण कमल के फूल से ही होता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पूजा-पाठ और मंत्रजाप की माला में प्रयोग किया जाने वाला कमलगट्टा खाने के काम भी आता है। कमल के इस फल में मौजूद बीजों को छीलकर खाया जाता है, जो मूंगफली की तरह होते हैं। यह स्वादिष्ट छोटा सा बीज कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होता है।
 
कमलगट्टा, कमल का बीज या कमल नट है जो कमल की प्रजातियों के फल (नेलुम्बो न्यूसीफेरा) से निकलता है। कई लोग मखाना को कमल का बीज कहते हैं लेकिन यह गलत है। मखाना या फॉक्सनट पानी की लिली की एक अलग प्रजाति से संबंधित है जिसे यूरेल फेरॉक्स कहा जाता है। चूंकि दोनों जलीय निवास में बढ़ती प्रजातियों से संबंधित हैं, इसलिए लोग पहचान के साथ भ्रमित होते हैं। दोनों फॉक्स नट्स (या गोर्गन नट्स) और लोटस नट्स खाने योग्य हैं, लेकिन उपयोग अलग है। मखानों को बनाने के लिए फॉक्सनट्स को उच्च ताप पर पॉपअप किया जाता है और जो पॉप नहीं किए जाते हैं उन्हें मखाने का सत्तू बनाया जाता है जो कि नवरात्रि के मौसम में उपलब्ध होता है क्योंकि यह एक उपवास भोजन है। कमल गट्टा या लोटस नट कभी भी उतना पॉप नहीं होता है जितना मैं जानती हूं।
कमल के बीज को ताजा खाया जाता है जब फल हरे होते हैं तो हरे मटर की तरह कोमल होते हैं। एक बार जब बीज आंतरिक हरे रंग के अंकुर को परिपक्व करना शुरू कर देता है तो कड़वा होने लगता है और बीज को खाने के लिए उस हरे रंग के अंकुर को निकालने की आवश्यकता होती है।
कमलगट्टे की तरह ही कमल की जड़ यानि कमल-ककड़ी का प्रयोग भी सब्जी के रूप में किया जाता है। खास तौर से पंजाब में इसे लोग काफी पसंद करते हैं। इसके अलावा भी सिंधी और पंजाबी लोगों में कमल-ककड़ी को बेहद पसंद किया जाता है। यह डाइबिटीज, दिमागी क्षमता, प्रजनन क्षमता, किडनी और पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद होता है। आइए जानते है इनके कुछ फायदे:
  1. लोटस के बीज क्रोनिक डायरिया को रोकने में मददगार होते हैं। क्योंकि इसमें उच्च मात्रा में कसैले गुण होते हैं और भूख बढ़ाने के लिए भी इसका सेवन किया जाता है। इसके अलावा, जो लोग कब्ज से पीड़ित हैं, उन्हें इससे बचना चाहिए।
  2. ये बीज गर्भाशय के आंतरिक स्‍तर को भी मजबूत करते हैं और अबॉर्शन और मिसकैरेज जैसी स्थितियों से बचाव करता है। इसलिए जो महिलाएं इनफर्टिल‍िटी से जूझ रही है उनकी ल‍िए ये बहुत ही फायदेमंद औषधि की तरह काम करता है।
  3. अगर आप वजन घटा रहे है तो इन बीजों को स्नैक्स के रूप में इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इनका सेवन करने से पेट भरा हुआ रहता है और ज्‍यादा भूख नहीं लगती है। वजन कम करने के दौरान कमलगट्टा आपको आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।
  4. इन बीजों में एंटी-एजिंग एंजाइम होता है, जो माना जाता है कि यह चेहरे की कोशिकाओं में क्षतिग्रस्त प्रोटीन की मरम्मत करता है। आयुर्वेद के अनुसार, कमल गट्टा में कसावट के गुण मौजूद होते है जो किडनी को विशिष्ट लाभ पहुंचाते हैं।
  5. डायबिटीज़ पेशेंट जिनको इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन की समस्‍या हो जाती है, उनके लिए भी यह बहुत गुणकारी होता है। कमलगट्टा का सेवन करने से यह समस्या दूर हो जाती है।
  6. आयुर्वेद विशेषशज इन बीजों को आयुर्वेदिक तैयारियों में उपयोग करने की सलाह देते हैं जो शुक्राणुओं की संख्या और शुक्राणु की गतिशीलता को बढ़ाने के लिए उपयोग में ल‍िए जाते हैं। कमल के बीजों के सेवन से पुरुष प्रजनन क्षमता में सुधार होता है।
100 ग्राम कमल के बीजों में 89 कैलोरी होती है। इनमें पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी -6 और आयरन भरपूर मात्रा में होता है। इन बीजों में केवल 0.5% वसा और शून्य कोलेस्ट्रॉल होता है। वे प्रोटीन की अच्छी मात्रा (4.1 ग्राम) की आपूर्ति भी करते हैं।

नोट: कमल के बीजों में ऊतकों को सूखाने के गुण होते हैं इसलिए इसके अधिक सेवन से कब्ज की समस्‍या भी हो सकती है। कमल गट्टा का सेवन करने के बाद बहुत सारा पानी जरुर पीएं।

कमलगट्टे की रेसिपी 
कमल के बीज या कमल गट्टा हमेशा एक दुर्लभ भोजन रहा है क्योंकि बहुत कम लोग ही इसे पकाते है। नवरात्र में कमलगट्टे का सत्तू भी बाजार में उपलब्ध होता है। जैसा कि मैंने कहा यह मटर के दानों जैसा नरम होता है तो बहुत जगह इसका निमोना भी बनता है। कमलगट्टा के छोटे और कच्चे बीज बड़े और पके हुए की तुलना में अधिक स्वादिष्ट होते हैं, जो जितना बड़ा होता है उससे थोड़ा कड़वा स्वाद मिलता है। इसलिए यदि आपके पास विकल्प है, तो छोटे बीजों को ही खरीदे। जो रेसिपी मैं आपको बताने जा रही वो बनाने में मुश्किल से 15-20 मिनट लगेगा। वैसे इस डिश को बनने से ज्यादा इसकी तैयारी में समय लगता है, आप जब  बनाएंगे तो खुद ही देखिएगा। आइए इसकी रेसिपी जानते है।
कमलगट्टे का नमकीन स्नैक
सामग्री
  • 10 -15 कमल बीज
  • 1 बड़ा चम्मच तेल
  • ½ चम्मच जीरा
  • 1 चम्मच धनिया पाउडर
  • ½ चम्मच गरम मसाला
  • स्वादानुसार नमक

एक पैन में तेल गरम करें और जब यह गर्म हो जाए तो इसमें जीरा और धनिया डालें। मसाले को चलाए ताकि वे जलें नहीं। जब वह अपना रंग थोड़ा बदल दे, तो कमलगट्टा डाल दें। उन्हें चलाए और अगले पांच मिनट में उन्हें भूनने दे। पांच मिनट के बाद, अपने कमल के बीजों पर नमक और गरम मसाला छिड़कें, एक बार फिर से इसे अच्छी तरह से मिलाने के लिए चलाए और लास्ट में इसे स्टोव से निकाल लें। गरमागरम सर्व करें।

कमलगट्टे का हलवा
सामग्री
  • 150 ग्राम कमल गट्टा रात भर भिगोया
  • 50 ग्राम घी (3 बड़ा चम्मच)
  • 50-70 ग्राम चीनी (मैंने गुड़ के दानों का इस्तेमाल किया)
  • गार्निश करने के लिए कटे हुए मेवे

बीजों को छीलकर एक बार धुल लें। बिना कोई पानी डाले, पेस्ट बनाएं। एक कढाई में घी गरम करें और उसमें कमल गट्टे का पेस्ट डालें। इसके गर्म होते ही पेस्ट चिपचिपा होने लगता है। नीचे की तरफ रगड़ते रहें और एक चिकनी और मोटी स्थिरता प्राप्त करने के लिए लगभग 10 मिनट तक हिलाएं। अगर लोहे के कढाई का उपयोग किया जाए तो आप देखेंगे कि पेस्ट गहरा हो जाएगा, अगर आप हल्का रंग चाहते हैं तो स्टील के कढाई का उपयोग करें। अच्छे से मिक्स हो जाने पर मिश्रण में चीनी या गुड़ मिलाएं। एक-दो मिनट तक पकाएं। आप चाहे तो इसे थाली में जमाकर, ठंडा होने पर बर्फी के आकार का काट के खा सकते है या गरमा गरम हलवा खा सकते।
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धन्यवाद!

Comments

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